- जनपद के 55 प्रमुख स्थानों व अस्पतालों में कराया गया है दीवार लेखन
- पीएसआई इंडिया व केनव्यू के सहयोग से चलाया जा रहा ‘डायरिया से डर नहीं’ कार्यक्रम
मिर्जापुर । शून्य से पांच साल तक के बच्चों को डायरिया से सुरक्षित बनाने के लिए दीवार लेखन के जरिए डायरिया के प्रति जागरूकता की अलख जगाई जा रही है। पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल इंडिया (पीएसआई इंडिया) और केनव्यू के सहयोग से जनपद में चलाये जा रहे ‘डायरिया से डर नहीं’ कार्यक्रम के तहत यह पहल की गयी है। इसके लिए ऐसे स्थलों को चयनित किया गया है, जहाँ पर ज्यादा से ज्यादा लोगों की नजर जाए और वहां लिखे संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने में लोग मददगार बन सकें। जनपद के 55 प्रमुख स्थानों पर अब तक डायरिया के प्रति जागरूकता सम्बन्धी संदेशों को दीवार लेखन के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने की कोशिश की गयी है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सी. एल. वर्मा का कहना है कि ‘डायरिया से डर नहीं’ कार्यक्रम मिर्जापुर समेत उत्तर प्रदेश के 13 जनपदों में चलाया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य शून्य से पांच साल तक के बच्चों की डायरिया के कारण होने वाली मृत्यु दर को शून्य करना और दस्त प्रबंधन को बढ़ावा देना है। डायरिया से किसी भी बच्चे की मौत न होने पाए, इसके लिए समुदाय में जागरूकता बहुत जरूरी है। अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी व नोडल अधिकारी प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य (आरसीएच) डॉ. वी. के. चौधरी का कहना है कि दीवार लेखन जागरूकता के लिए एक सशक्त माध्यम साबित हो सकता है। इस दिशा में पीएसआई इंडिया और केनव्यू के माध्यम से किये जा रहे प्रयासों को उन्होंने सराहा। कार्यक्रम के तहत फ्रंटलाइन वर्कर को प्रशिक्षित किया जा रहा है और निजी क्षेत्र के चिकित्सकों व अस्पतालों को भी जोड़ा जा रहा है।
जनपद के चील्ह क्षेत्र में एक प्रमुख स्थान पर दीवार लेखन कर “ओआरएस और जिंक के साथ, डायरिया से डर नहीं” शीर्षक के तहत लिखे गए सन्देश इस प्रकार हैं- टीकाकरण सारणी के अनुसार सारे टीके लगवाएं और रोटावायरस, विटामिन ए को लेना न भूलें। भोजन को ढककर रखें ताकि मक्खियाँ उस पर न बैठें। जिंक की खुराक को दस्त ठीक होने के बाद भी 14 दिनों तक जारी रखें। पीने के पानी को साफ़ रखें और पीने के पानी को निकालने के लिए डंडीदार लोटे का प्रयोग करें । छह माह से छोटे बच्चों को दस्त होने पर भी स्तनपान जारी रखें । डायरिया के दौरान ओआरएस से शरीर में पानी की कमी को रोकें।
इसी तरह अन्य स्थलों पर भी दीवार लेखन के माध्यम से जन-जन को बताया जा रहा है कि बच्चे को दिन में तीन बार से अधिक पतली दस्त हो, प्यास ज्यादा लगे और आँखें धंस गयी हों तो यह डायरिया के लक्षण हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में बच्चे को जल्दी से जल्दी ओआरएस का घोल देना शुरू करें और तब तक इस घोल को देते रहें जब तक की दस्त ठीक न हो जाए। इसके साथ ही निकटतम स्वास्थ्य केंद्र से सम्पर्क करना चाहिए। इसके अलावा स्थानीय एएनएम या आशा दीदी के सहयोग से जिंक की गोली प्राप्त कर सकते हैं और उनके द्वारा बताये गए तरीके से 14 दिनों तक बच्चों को अवश्य दें। डायरिया से बचाव के लिए साफ-सफाई सम्बन्धी जरूरी संदेशों को भी प्रचारित किया जा रहा है। यह सन्देश कुछ इस तरह हैं- शौच और बच्चों का मल साफ़ करने के बाद, भोजन बनाने और खिलाने से पहले हाथों को साबुन-पानी से अच्छी तरह अवश्य धुलें। माताएं छह माह से ऊपर के बच्चों को स्तनपान कराती रहें और हमेशा साफ़-सुथरा पानी ही पिलाएं। छह माह से कम उम्र के बच्चों को स्तनपान के अलावा बाहरी कोई भी चीज न दें यहाँ तक कि पानी भी नहीं। इस अवस्था में बाहरी चीज देने से संक्रमण का जोखिम बना रहता है। मां के दूध में बच्चे की जरूरत के मुताबिक़ पानी की मात्रा होती है, इसलिए बाहर से पानी भी न पिलाएं।