नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज सेवा तीर्थ भवन परिसर के नामकरण का अनावरण किया। सेवा तीर्थ में प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय स्थित हैं, जो पहले अलग-अलग स्थानों पर स्थित थे। कई दशकों से केंद्रीय मंत्रालय और कार्यालय सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में अलग-अलग इमारतों में बिखरे हुए थे।
इससे कार्यक्षमता में कमी, समन्वय की चुनौतियां, रखरखाव की बढ़ती लागत और उपयुक्त कार्य वातावरण की कमी जैसी समस्याएं सामने आती थीं। नई व्यवस्था से इन समस्याओं का समाधान होगा और प्रशासनिक कार्य एक आधुनिक, कुशल और नागरिक-केंद्रित ढांचे में संचालित होंगे।
2014 से मोदी सरकार ने भारत के औपनिवेशिक अतीत के प्रतीकों से दूर जाने और मानसिकता में बदलाव लाने के लिए लगातार कदम उठाए हैं। अब प्रमुख परिवर्तनों के बाद साउथ ब्लॉक को सेवा तीर्थ, केंद्रीय सचिवालय को कर्तव्य भवन, राजपथ को कर्तव्य पथ, रेस कोर्स रोड को लोक कल्याण मार्ग और राज भवन/राज निवास को लोक भवन/लोक निवास कहा जाएगा।
पीएम ने नए कार्यालय से चार बड़ी योजनाओं पर किए हस्ताक्षर : सेवा तीर्थ यानि प्रधानमंत्री कार्यालय का नया पता और इस कार्यालय से प्रधानमंत्री ने एक नई योजना के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं। ये योजना है 'पीएम राहत योजना'। जिसके तहत दुर्घटना पीड़ितों को ₹1.5 लाख तक का कैशलेस इलाज सुनिश्चित किया गया है। इसके अलावा महिला-युवा और संवेदनशील वर्ग के लिए अन्य महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। जिनमें लखपति दीदी का लक्ष्य दोगुना कर दिया गया है। अब 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया है। कृषि अवसंरचना कोष को दोगुना कर ₹2 लाख करोड़ कर दिया गया। इसका सीधा लाभ किसानों को होगा। वहीं युवाओं के रोज़गार और उनके भविष्य के लिए 10 हजार करोड़ रुपये के स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 को मंज़ूरी प्रधानमंत्री ने दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली में नवनिर्मित 'सेवा तीर्थ' से इन चार बड़े फैसलों पर हस्ताक्षर कर शुरुआत की है। इसका सीधे मायने हैं जैसा नाम वैसा ही काम। यानि सेवा तीर्थ जो जनकल्याण और विकसित भारत के लक्ष्यों को सुनिश्चित कर जनता के जीवन को आसान बनाएगा।