पहले बनाए बहाने, समझाने पर आये दवा खाने



  • अभियान के दौरान सचेंडी समेत कई गांव में नहीं खाई थी लोगों ने दवा
  • विभाग ने गांव में बच्चों संग रैली निकाल बीमारी के प्रति किया जागरूक
  • फाइलेरिया की गंभीरता समझ में आते ही सभी लगे दवा खाने

कानपुर नगर  - दस अगस्त से शुरू हुए फाइलेरिया उन्मूलन अभियान की राह में आने वाली चुनौतियों से जूझते हुए विभाग और फाइलेरिया नेटवर्क समूह लोगों को इस बीमारी की गंभीरता से रूबरू कराकर दवा खिला रहा है। अभियान के तीसरे दिन घाटमपुर, कल्याणपुर, सरसौल व भीतरगांव समेत अन्य ब्लाक के रहनस ,कटरा भैसौर, सचेंडी, भद्रास, चिर्ल्ली, गम्भीरपुर और सेवधरीगांव में ग्रामीणों ने दवा खाने से इनकार कर दिया। इसके बाद विभाग सहित फाइलेरिया नेटवर्क समूह ने दो दिनों तक गांव में अभियान चलाकर लोगों को इस बीमारी की गंभीरता से रूबरू कराया, तब कहीं जाकर लोग दवा खाने को राजी हुए।

10 अगस्त से सर्वजन दवा सेवन अभियान (आईडीए) की शुरुआत हुई है। इस अभियान का उद्देश्य फाइलेरिया की बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण और फाइलेरिया ग्रसित मरीजों का उचित प्रबंधन है। लोगों को इस बीमारी की गंभीरता से रूबरू कराने को लेकर स्वास्थ्य विभाग और सहयोगी संस्थाएं डब्ल्यूएचओ, सीफार और पीसीआई भी लगातार लोगों के बीच काम कर रही हैं। जिला मलेरिया अधिकारी एके सिंह ने बताया कि पहले दिन सभी ब्लाक के जिन गांव में लोगों ने दवा खाने से इनकार कर दिया था वहां दूसरे दिन ही फाइलेरिया नेटवर्क समूह के सदस्यों सहित गांव के परिषदीय विद्यालय के बच्चों, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सीएचओ व एचईओ  के साथ जागरूकता रैली निकाली गई। ग्रामीणों को पंफलेट और हैंडबिल बांटे गए। उन्हें बीमारी की गंभीरता से रूबरू कराया गया, जिसके बाद लोग दवा खाने को राजी हुए। अभी तक अभियान के शुरुआती दिनों में जनपद में 54 फीसदी से अधिक लोग दवा का सेवन कर चुके हैं।

उन्होंने बताया कि पतारा ब्लॉक के कई क्षेत्रों में भी लोग दवा को लेकर तमाम भ्रांतियां पाले थे, लेकिन वहां के प्रधानों के दवा खाने के बाद लोगों ने दवा खानी शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि इस तरह की चुनौतियां कुछ और गांवों में आ रही हैं, जिसके चलते संबंधित गांवों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

दवा पूरी तरह से सुरक्षित, सेवन जरूर करें : मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आलोक रंजन ने लोगों से फाइलेरिया उन्मूलन अभियान को सफल बनाने की अपील की है। उन्होंने कहा हे कि जब स्वास्थ्य कर्मी दवा खिलाने घर आएं तो दवा खाने से इनकार नहीं करें, उनके सामने ही दवा खा लें। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया लाइलाज बीमारी है। इससे बचने का एकमात्र उपाय दवा सेवन है। लोग बगैर किसी डर या भ्रांति के दवा का सेवन करें। दवा पूरी तरह से सुरक्षित है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि इस अभियान के दौरान जिले में तीन दवाएं खिलाई जा रहीं हैं। फाइलेरियारोधी दवा का सेवन दो वर्ष के बच्चों, गर्भवती, एक माह की प्रसूता और अति गंभीर बीमार को छोड़कर सभी को करना है। आइवरमेक्टिन ऊंचाई के अनुसार खिलाई जा रही है । एल्बेंडाजोल को चबाकर ही खानी है। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम के तहत एक से दो वर्ष की आयु के बच्चों को एल्बेंडाजोल की आधी गोली घोलकर पिलाई जा रही है।