कार्यशाला से पूरे उत्तर प्रदेश में होगा खर्राटे व नींद की समस्याओं का उपचार : डॉ.सूर्य कान्त



  • केजीएमयू में स्लीप सर्टिफिकेशन कोर्स कार्यशाला आयोजित
  • केजीएमयू बने खर्राटे एवं निद्रा सम्बन्धी रोगों का प्रमुख प्रशिक्षण केंद्र : डॉ. सोनिया नित्यानंद

लखनऊ । आज की भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में नींद से जुड़ी बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। कई लोग खर्राटों, बार-बार नींद टूटने, दिनभर थकान रहने या अत्यधिक नींद आने जैसी समस्याओं को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि ये संकेत स्लीप एपनिया, अनिद्रा या नींद सम्बंधित अन्य गंभीर स्थितियों की ओर इशारा कर सकते हैं। समय रहते इन समस्याओं की पहचान और इलाज न होने से हृदय रोग, स्ट्रोक, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और मोटापे का खतरा बढ़ जाता है। चिड़चिड़ापन, अवसाद और सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम भी बढ़ सकता है। ये बातें किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकान्त ने कहीं। वे अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर, लखनऊ में रविवार को आयोजित आईसीएस स्लीप सर्टिफिकेशन कोर्स की कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।

इंडियन चेस्ट सोसाइटी तथा स्नोरिंग एंड स्लीप रिलेटेड डिसऑर्डर्स सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस एक दिवसीय हैंड्स-ऑन कार्यशाला का उद्देश्य चिकित्सकों को अपने-अपने क्षेत्रों में बेहतर स्लीप केयर सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए व्यावहारिक दक्षता प्रदान करना था। कार्यशाला में देशभर से स्लीप मेडिसिन के विशेषज्ञ एवं चिकित्सक भाग लिया। 

स्लीप एपनिया के लक्षण : डॉ. सूर्यकांत ने बताया - मोटापा, छोटी और मोटी गर्दन (कॉलर साइज 42 सेमी से अधिक), डबल चिन तथा जबड़े या नाक की बनावट में समस्या खर्राटों और स्लीप एपनिया के प्रमुख संकेत हो सकते हैं। टॉन्सिल का बढ़ना, नाक में रुकावट या भारी जीभ से भी श्वास मार्ग में रुकावट का जोखिम बढ़ा सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर समय रहते चिकित्सकीय परामर्श आवश्यक लें।

स्लीप एपनिया से बड़े ही नहीं, बच्चे भी प्रभावित : डॉ. सूर्यकांत ने बताया - स्लीप मेडिसिन रिव्युज़ जर्नल में 2023 में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, वयस्क पुरुषों में लगभग 40 प्रतिशत और वयस्क महिलाओं में लगभग 20 प्रतिशत लोग खर्राटों की समस्या से प्रभावित हैं, जबकि 18 वर्ष से कम की आयु के लगभग 10 प्रतिशत बच्चों में भी यह समस्या देखी जाती है।  कार्यशील आयु वर्ग के लगभग 10 करोड़ 40 लाख  से अधिक भारतीय ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया से प्रभावित हैं, जिनमें से करीब 4.7 करोड़ लोग मध्यम से गंभीर श्रेणी में आते हैं।

मुंबई से आईं इंडियन चेस्ट सोसाइटी की सचिव डा.अमिता नेने ने कहा – ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (ओएसए) एक नींद संबंधी विकार है जो सोते समय आपकी सांस लेने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है। इससे श्वास नली में रुकावट आती है। लेकिन इस स्थिति का इलाज संभव है।

कार्यशाला में स्लीप मेडिसिन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर क्रमवार सत्र आयोजित किए गए। विशेषज्ञों ने खर्राटे की समस्या से लेकर स्लीप एपनिया के उपचार, सीपैप (सीपीएपी) के उपयोग, स्लीप स्टडी के दौरान आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों तथा विभिन्न नींद सम्बन्धी विकारों के प्रबंधन पर सरल एवं व्यवहारिक जानकारी साझा की। 

प्रतिभागियों को स्लीप लैब सेटअप, स्लीप स्टडी रिपोर्ट पढ़ने, स्कोरिंग, उपकरणों के उपयोग और ट्रबलशूटिंग की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी गई। अंत में एग्जिट एग्जाम आयोजित किया गया, जिसके आधार पर श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र एवं पुरस्कार प्रदान किए गए। केजीएमयू की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने इस कार्यशाला को आयोजित करने के लिए आयोजकों डॉ. सूर्यकांत, डॉ. अमिता नेने, डॉ. ज्योति बाजपाई, डॉ. श्वेता और डॉ. अंकित कुमार को बधाई दी और उम्मीद जताई कि केजीएमयू पूरे उत्तर प्रदेश के लिए खर्राटे अवं नींद सम्बन्धी बिमारियों के लिए एक प्रमुख प्रशिक्षण केंद्र बनेगा।