प्रांतीय शैक्षिक कार्यशाला में जन सहभागिता से पर्यावरण संरक्षण पर हुआ मंथन



लखनऊ। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास - पर्यावरण शिक्षा अवध प्रांत के तत्वावधान में एक प्रांतीय शैक्षिक कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य जन सहभागिता के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को लेकर वैचारिक विमर्श, अनुभव साझा करना तथा भावी कार्ययोजना तैयार करना रहा।

कार्यशाला के दौरान “जन सहभागिता द्वारा पर्यावरण संरक्षण” विषय पर सारगर्भित चर्चा हुई। वक्ताओं ने पर्यावरणीय चुनौतियों, उनके व्यावहारिक समाधानों तथा समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भूमिका पर विशेष बल दिया। चर्चा में यह स्पष्ट किया गया कि पर्यावरण संरक्षण केवल नीतियों या संस्थानों तक सीमित न रहकर जन–आंदोलन के रूप में अपनाया जाना समय की आवश्यकता है।

इस बैठक में प्रमुख रूप से डॉ. कीर्ति विक्रम सिंह (क्षेत्र संयोजक, पर्यावरण शिक्षा - पूर्वी उत्तर प्रदेश), के. बी. पंत (सह संयोजक, पर्यावरण शिक्षा – अवध प्रांत), नंदकिशोर वर्मा (संयोजक, लखनऊ महानगर), अनिल श्रीवास्तव (संयोजक, आत्मनिर्भर भारत) सहित संगठन से जुड़े लगभग 30 कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

कार्यशाला में विशेष अतिथि के रूप में वीरेंद्र सिंह (वरिष्ठ पत्रकार), डॉ.सृष्टि तिवारी (सहायक आचार्य, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, लखनऊ परिसर), डॉ. अनामिका (सहायक आचार्य, के. के. सी. कॉलेज, लखनऊ), मुकेश सिंह (दूरदर्शन, लखनऊ) की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी विशिष्टजनों ने पर्यावरण संरक्षण के विविध आयामों पर अपने विचार रखे तथा शिक्षा संस्थानों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

बैठक में यह महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित हुआ कि संस्कृत पाठशाला स्कूल को पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से एक प्रतिमान (मॉडल) केंद्र के रूप में विकसित किया जाए, जहाँ पर्यावरण -अनुकूल गतिविधियाँ, वृक्षारोपण, जल संरक्षण, स्वच्छता, कचरा प्रबंधन तथा पर्यावरणीय जागरूकता कार्यक्रम नियमित रूप से संचालित हों।

विद्यालय के ट्रस्टी अंकुर अग्रवाल ने इस दिशा में हर संभव सहयोग प्रदान करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की, जिससे इस पहल को व्यवहारिक रूप से साकार किया जा सके। कार्यशाला में यह भी निर्णय लिया गया कि संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं की प्रत्येक माह के अंतिम शनिवार को बैठक सुनिश्चित की जाएगी, जो आवश्यकता अनुसार ऑफलाइन अथवा ऑनलाइन माध्यम से आयोजित होगी, ताकि निरंतर संवाद, समीक्षा एवं कार्य-प्रगति बनी रहे।

बैठक के अंत में उपस्थित कार्यकर्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण से संबंधित अपने सुझाव, स्थानीय स्तर पर किए गए प्रयासों एवं व्यक्तिगत अनुभव साझा किए, जिन्हें भावी कार्ययोजना में सम्मिलित करने पर सहमति बनी। समग्र रूप से यह प्रांतीय शैक्षिक कार्यशाला पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन जागरूकता, संगठनात्मक समन्वय तथा ठोस कार्ययोजना की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं सार्थक पहल सिद्ध हुई।