मुख्‍यमंत्री बाल सेवा योजना दे रही अनाथ हो चुके बच्‍चों को सहारा



  •  मार्च 2020 के बाद माता – पिता या दोनों की मौत पर बच्‍चों का खर्च उठा रही सरकार
  • केवल कोविड के चलते नहीं, किसी भी कारण से अनाथ हुए बच्‍चों को योजना का मिल रहा लाभ

संतकबीरनगर - कोविड के चलते अनाथ हुए बच्‍चों के लिए चलाई गयी मुख्‍यमन्‍त्री बाल सेवा योजना में बड़ा बदलाव किया है। इसका नाम उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना सामान्य कर दिया गया है। इसके तहत अब केवल कोविड के चलते ही नहीं बल्कि किसी भी कारण से अनाथ हुए  सभी 18 साल तक की उम्र के बच्चों को ढाई हजार रुपए हर माह मिल रहे हैं । इसके साथ ही 18 से 23 वर्ष तक के उन बच्चों को भी इस योजना का लाभ दिया जा रहा है , जो कोविड या अन्य किसी कारणों से अनाथ हुए हैं।

जिला प्रोबेशन अधिकारी डॉ श्‍वेता ने बताया कि इस योजना का लाभ उन बच्‍चों को मिलेगा जिनके माता या पिता में से एक या फिर दोनों की मौत मार्च 2020 के बाद हुई है। इस योजना का लाभ एक परिवार के अधिकतम 2 बच्चों को मिल सकेगा। इस योजना के अन्तर्गत पात्रता की श्रेणी में आने वाले परिवार के बच्चों को हर महीने 2500 रुपए की सहायता धनराशि दी जायेगी। यदि अनाथ हुए बच्चे की उम्र 18 साल से ज्यादा है तो उस बच्चे को 23 साल की उम्र पूरी होने तक या ग्रेजुएशन पूरा होने तक या दोनों में से जो भी पहले पूरा होगा, योजना का लाभ मिलता रहेगा। इसमें कक्षा 12 तक की पढ़ाई, राजकीय महाविद्यालय, विश्वविद्यालय अथवा तकनीकी संस्थान से स्नातक डिग्री अथवा डिप्लोमा करने वालों को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा नीट, क्लैट और जेईई जैसी राष्‍ट्रीय स्‍तर की या राज्‍यस्‍तरीय प्रतियोगिता में सफल बच्चे भी इस योजना का लाभ पाएंगे। जिले में अब तक कुल 170 बच्‍चों को इस योजना के तहत लाभ दिया जा रहा है।

बाल सेवा योजना से मिला बड़ा सहारा : जिले के धनघटा थानाक्षेत्र के एक गांव के निवासी दो बच्‍चों के माता पिता दोनों की मौत फरवरी 2022 में हो गयी । बड़े भाई 17 वर्षीय सुनील ( बदला हुआ नाम ) बताते हैं कि उन्होंने इस योजना के तहत फार्म भरा था। दोनों भाइयों को अभी तक 15 हजार रुपए तीन महीने की पहली किस्‍त के रुप में मिले। दूसरी किस्‍त आने वाली है। छोटा भाई इंटरमिडिएट की पढ़ाई कर रहा है। इस योजना से मिले पैसे से उनकी पढ़ाई बेहतर तरीके से हो रही है तथा जीवन यापन करने में कोई कठिनाई नहीं होती है। अगर योजना नहीं रहती तो उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता।

कोविड से मौत की नहीं है बाध्‍यता : केवल कोरोना से मृत अभिभावकों के बच्चों के लिए सरकार ने ‘उत्तर-प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना’ शुरू किया था। इसमें 18 वर्ष तक के सिर्फ उन बच्चों को ही 4000 रुपए प्रतिमाह देने की व्यवस्था है, जिनके अभिभावक की मौत कोरोना के करण हुई, लेकिन नई योजना इससे पूरी तरह से अलग है।

इन प्रपत्रों की होगी जरुरत : इस योजना का लाभ पाने के लिए बच्‍चे का आधार कार्ड, उनके माता या पिता की मृत्‍यु पर मार्च 2020 के बाद जारी मृत्‍यु प्रमाण पत्र, बच्‍चों का बैंक पासबुक और आय प्रमाण पत्र आवश्‍यक है। योजना के तहत अगर पति की मौत हुई है तो पत्‍नी को विधवा पेंशन से भी आच्‍छादित किया जाएगा।

वेश्यावृत्ति में शामिल परिवारों के बच्चों को भी मिलेगी मदद : ऐसे बच्चों को भी इस योजना का लाभ मिल सकेगा, जिनकी माता तलाकशुदा स्त्री या परित्यक्ता हैं या जिनके माता-पिता या परिवार का मुखिया जेल में है। बाल श्रम, भिक्षावृत्ति, वेश्यावृत्ति से मुक्त कराए गए बच्चों को भी इस योजना के तहत लाभ दिया दिया जाएगा। इसके साथ ही भिक्षावृत्ति या वेश्यावृत्ति में शामिल परिवारों के बच्चों को भी आर्थिक मदद देने का फैसला लिया गया है।