लखनऊ जंक्शन पर गूंज रहा गीता का संदेश, ‘गीता संवाद’ प्रतिमा से यात्रियों को मिल रही कर्मयोग और सकारात्मकता की प्रेरणा



लखनऊ। पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल ने भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक सराहनीय पहल करते हुए लखनऊ जंक्शन रेलवे स्टेशन पर ‘गीता संवाद’ की भव्य प्रतिमा स्थापित की है। स्टेशन परिसर में कांच के विशेष कक्ष में स्थापित यह प्रतिमा महाभारत के उस ऐतिहासिक प्रसंग को जीवंत करती है, जब कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र में योगेश्वर श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का अमर उपदेश दिया था। प्रतिमा के साथ गीता के प्रसिद्ध श्लोक ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन’ का लगातार मंत्रोच्चार वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता से भर रहा है।आधुनिक एलईडी प्रकाश व्यवस्था से सुसज्जित यह प्रतिमा दिन और रात दोनों समय यात्रियों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रही है। स्टेशन पर आने-जाने वाले हजारों यात्रियों के लिए यह केवल एक कलात्मक प्रस्तुति नहीं, बल्कि भारतीय जीवन दर्शन और कर्मयोग का सशक्त संदेश बनकर उभरी है।

प्रतिमा के माध्यम से यात्रियों को अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित रहने, जीवन की चुनौतियों का धैर्यपूर्वक सामना करने तथा निरंतर कर्म करते रहने की प्रेरणा मिल रही है।मंडल रेल प्रबंधक गौरव अग्रवाल ने बताया कि रेलवे स्टेशन केवल यात्रियों की आवाजाही का केंद्र नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों के प्रसार का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि गीता के उपदेश आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने हजारों वर्ष पहले थे। ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन’ का संदेश व्यक्ति को अपने कार्य के प्रति समर्पित रहने और परिणाम की चिंता किए बिना निरंतर प्रयास करने की सीख देता है। यही संदेश जीवन में सफलता और संतुलन का आधार बनता है।उन्होंने कहा कि स्टेशन पर स्थापित ‘गीता संवाद’ प्रतिमा यात्रियों, रेलवे कर्मचारियों और आम नागरिकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। विशेष रूप से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और गीता के जीवनोपयोगी संदेशों से परिचित कराने में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। 

इसके अलावा देश के विभिन्न हिस्सों तथा विदेशों से आने वाले पर्यटक भी इस प्रतिमा के माध्यम से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और आध्यात्मिक विचारधारा से परिचित हो सकेंगे।रेलवे प्रशासन का मानना है कि सार्वजनिक स्थलों पर इस प्रकार की सांस्कृतिक और प्रेरणादायी स्थापनाएं समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने के साथ-साथ लोगों को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ने का कार्य करती हैं। लखनऊ जंक्शन पर स्थापित ‘गीता संवाद’ प्रतिमा भी इसी उद्देश्य को साकार कर रही है। स्टेशन परिसर में पहुंचने वाले यात्री जहां एक ओर आधुनिक रेलवे सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें भारतीय संस्कृति और अध्यात्म का संदेश भी प्राप्त हो रहा है।

यह प्रतिमा न केवल लखनऊ जंक्शन की सुंदरता में वृद्धि कर रही है, बल्कि भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और कर्मयोग के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम भी बन रही है। रेलवे की यह पहल यात्रियों के मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने के साथ-साथ उन्हें जीवन में कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और समर्पण की भावना अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है। इस कारण ‘गीता संवाद’ प्रतिमा स्टेशन आने वाले लोगों के लिए आकर्षण, प्रेरणा और आध्यात्मिक अनुभूति का नया केंद्र बन गई है।