मासिक धर्म से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करें, महिलाओं को स्वस्थ बनाने में मददगार बनें - मुकेश शर्मा



  • विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस (28 मई) पर विशेष
  • “एक #मासिक धर्म अनुकूल दुनिया के लिए मिलकर काम करें” थीम पर मनेगा दिवस

मासिक धर्म (माहवारी) यानि पीरियड्स एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है। इसको लेकर किसी भी तरह की शर्मिंदगी महसूस करने, लोगों के सामने नजरें चुराने या झिझक महसूस करने की गलती कभी न करें। पीरियड्स के दौरान भी साफ़-सफाई का पूरा ख्याल रखते हुए सामान्य दिनों की तरह पूरे आत्मविश्वास के साथ जीवनयापन करें। मासिक धर्म को लेकर आज भी समाज में व्याप्त तरह-तरह की रूढ़िवादिता और भ्रांतियों को पूरी तरह से ख़त्म करने की जरूरत है। इसी को ध्यान में रखते हुए हर साल 28 मई को विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस मनाया जाता है, जिसका मूल मकसद मासिक धर्म से जुड़ीं भ्रांतियों को जड़ से मिटाते हुए किशोरियों और युवतियों को इस बारे में खुलकर बात करने की आजादी देने के साथ एक स्वस्थ माहौल प्रदान करना है।

मासिक धर्म की सामान्य अवधि यानि पांच दिनों के दौरान साफ़-सफाई सबसे महत्वपूर्ण है, जिसके बारे में किशोरियों और महिलाओं को जागरूक बनाना है। इस वर्ष इस खास दिवस की थीम “एक #मासिक धर्म अनुकूल दुनिया के लिए मिलकर काम करें”  तय की गयी है। आज यह तय करने की जरूरत है कि हर किशोरी और युवती को सुरक्षित और किफायती सेनेटरी पैड की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा मासिक धर्म के दौरान निजी शौचालय और पानी की पर्याप्त उपलब्धता हो। मासिक धर्म के बारे में सही जानकारी या जागरूकता के अभाव में आज भी समाज के कुछ वर्गों में युवतियां खासकर किशोरियां कई तरह की दिक्कतों, झिझक और संकोच का सामना करती हैं। यहाँ तक कि बच्चियां इस दौरान स्कूल तक जाने से कतराती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए बचपन से किशोरावस्था की दहलीज पर पहुँचने वाली बच्चियों को मासिक धर्म के बारे में जरूर शिक्षित किया जाए ताकि वह पहले से इस स्थिति से भलीभांति निपटने के लिए मानसिक रूप से अपने को तैयार कर सकें। उनको समझाना जरूरी है कि इस अवस्था में होने वाले शारीरिक बदलावों का यह भी एक हिस्सा मात्र है।  

मासिक धर्म के दौरान पूर्ण स्वच्छता, साफ़-सफाई न रखने से गंभीर संक्रमण की गुंजाइश बनी रहती है, इसलिए साफ-सफाई का खास ख्याल रखें। सैनिटरी पैड को दिन में जरूरत के मुताबिक़ 3-4 बार अवश्य बदलना चाहिए। उपयोग के बाद उसे कागज में लपेटकर सुरक्षित तरीके से कूड़ेदान में डालें। पैड के इस्तेमाल से पहले और बाद में हाथों को सही तरीके से अवश्य धोना चाहिए। यह भी जानना जरूरी है कि मासिक धर्म महज सैनिटरी पैड के इस्तेमाल और साफ़-सफाई तक ही सीमित रहने की बात नहीं है बल्कि इस दौरान होने वाले शारीरिक बदलावों और मासिक चक्र पर भी ध्यान देने की जरूरत है। अधिक रक्तस्राव या गंभीर दर्द की स्थिति में निकटतम सरकारी स्वास्थ्य इकाई पर जाकर चिकित्सकों से परामर्श भी लेना चाहिए ताकि उनके बताए अनुसार जरूरी जांच आदि कराई जा सके।

स्कूल, समुदाय, सरकारी व निजी संस्थान और विभिन्न संगठनों को भी इस मुद्दे पर जागरूकता लाने के साथ ही हर स्तर पर एक सकारात्मक माहौल और उचित प्रबन्धन की व्यवस्था सुनिश्चित करने की जरूरत है। कार्य स्थलों पर भी मासिक धर्म को जीवन का एक सामान्य हिस्सा के रूप में देखा जाये, सुरक्षित और किफायती मासिक धर्म उत्पाद आसानी से मुहैया कराये जाएँ, शौचालय और पानी की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, डस्टबिन की उचित व्यवस्था हो। कार्य स्थलों पर कामकाजी महिलाओं के साथ समय-समय पर इस विषय पर खुली चर्चा हो और चिकित्सकों की उपस्थिति में इससे जुड़े सवालों के जवाब मुहैया कराने का भी प्रबंध करना चाहिए।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5) 2020-21 के आंकड़ों को देखा जाए तो देश की 15 से 24 वर्ष आयु वर्ग की 77.3 फीसद युवतियां माहवारी के दौरान स्वस्थ व सुरक्षित तरीकों का इस्तेमाल करती हैं। एनएफएचएस-4 (2015-16) के आंकड़े की बात करें तो उस दौरान इस आयु वर्ग की महज 57.6 प्रतिशत लडकियां ही माहवारी के दौरान सुरक्षित तरीकों का इस्तेमाल करती थीं। प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र से कम कीमतों में सेनेटरी पैड की उपलब्धता से भी इस बड़े बदलाव को जोड़कर देखा जा सकता है। इसके अलावा इससे यह भी साफ़ अनुमान लगाया जा सकता है कि मासिक धर्म में स्वच्छता व उसके प्रबंधन को लेकर औपचारिक ज्ञान में वृद्धि के साथ ही जागरूकता भी आई है।  

 

(लेखक पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल इंडिया के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं)