कानपुर - चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कानपुर में शुक्रवार को कानपुर, चित्रकूटधाम और झांसी मण्डल की संयुक्त मण्डलीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी 2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर गोष्ठी का शुभारंभ किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रमुख सचिव कृषि रवीन्द्र ने की। गोष्ठी में तीन मण्डलों के 13 जनपदों से आए किसानों, कृषि विशेषज्ञों और अधिकारियों ने प्रतिभाग किया। इस दौरान खरीफ फसलों की उत्पादकता बढ़ाने, आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर विस्तृत चर्चा की गई।
अपने संबोधन में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि भारत में वैदिक काल से प्राकृतिक खेती की परंपरा रही है, जो स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए लाभकारी है। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते प्रयोग से अनेक बीमारियों का खतरा बढ़ा है, इसलिए प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए 95 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदेश में 110 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खाद्यान्न उत्पादन विस्तार का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। साथ ही दलहनी फसलों के क्षेत्रफल को चार लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने की योजना पर कार्य किया जा रहा है, जिससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि के साथ किसानों की आय में भी सुधार हो सके।
प्रमुख सचिव कृषि रवीन्द्र ने किसानों से रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर हरी खाद और जैविक खाद के उपयोग को बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ लेने के लिए किसानों को कृषक पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
कृषि निदेशक डॉ. पंकज त्रिपाठी ने जल संकट वाले क्षेत्रों, विशेषकर चित्रकूटधाम और झांसी मण्डल के किसानों को दलहन, तिलहन और रागी जैसी कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने वर्षा जल संरक्षण के लिए अवरोध बांध निर्माण और जल संचयन की तकनीकों पर भी जानकारी दी।गोष्ठी के दौरान विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किसानों को उन्नत बीज, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और पशुपालन से संबंधित तकनीकी जानकारी प्रदान की। इस अवसर पर चयनित चार किसानों को ई-लाटरी के माध्यम से ढैंचा बीज लघु किट वितरित की गईं।
कार्यक्रम में गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता, विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता, बीज विकास निगम के निदेशक टी. एम. त्रिपाठी सहित विभिन्न मण्डलों के मण्डलायुक्त, जिलाधिकारी और विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।