राष्ट्रीय क्षितिज पर गोरखपुर को नयी पहचान दी डॉ रामनवल ने



  • मंडल के महराजगंज जनपद में तैनात सर्जन ने 1.32  लाख से अधिक महिला नसबंदी की
  • राष्ट्रीय स्तर पर नई दिल्ली में स्वास्थ्य मंत्री के हाथों से हो चुके हैं सम्मानित

महराजगंज - गोरखपुर मंडल के महराजगंज जनपद में तैनात सर्जन डॉ रामनवल राष्ट्रीय क्षितिज पर गोरखपुर को नयी पहचान देने में जुटे  हैं । उन्हें 27 जुलाई 2022 को नई दिल्ली में स्वास्थ्य मंत्री ने भी सम्मानित किया । यह सम्मान उन्हें महिला नसबंदी में उनके प्रयासों को देखते हुए दिया गया । उन्होंने अपने करियर में 1.32 लाख से अधिक महिलाओं की नसबंदी की है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर उन्हें सेकेंड रैंकिंग मिली है।

अपर निदेशक–स्वास्थ्य गोरखपुर मंडल डॉ इंद्रविजय विश्वकर्मा का कहना है कि डॉ रामनवल के प्रयासों से पूरे प्रदेश और खासतौर से गोरखपुर मंडल को परिवार नियोजन सेवाओं में सम्मानजनक पहचान मिली है। उन्होंने जो कार्य किया है वह अन्य चिकित्सकों के लिए अनुकरणीय है । डॉ रामनवल प्रदेश स्तर से भी वह कई बार सम्मानित हो चुके हैं।

डॉ रामनवल बताते हैं कि जब कभी सेवा दिवस पर नसबन्दी के दौरान लाइट चली जाती है तो महिलाएं घबराने लगती हैं । ऐसे हालात में उन्हें समझा कर रोकना पड़ता है। जनरेटर स्टार्ट कराकर नसबंदी की जाती है। वह साथ में टार्च भी रखते हैं जिससे महिलाओं की बिजली जाने के दौरान और जेनरेटर चलने से पहले मदद की जाती है । वह बताते हैं कि पहले तो सड़कें भी खराब थी, जिससे विभिन्न अस्पतालों पर आयोजित सेवा दिवस पर पहुंचनें में विलंब होने से भी आशा कार्यकर्ता और महिलाएं घबराने लगती थीं, लेकिन अब सड़कें ठीक हो जाने से वह समस्या भी दूर हो गयी है।

अपनी चुनौतियों के बारे में वह बताते हैं कि कभी नसबन्दी के समय महिलाएं सेवा दिवस पर आकर ऐनवक्त पर नसबंदी कराने से मना कर देती हैं, तो उन्हें भी समझा कर अपना मोबाइल नंबर दे देते हैं । महिलाओं को उनके द्वारा बताया जाता है किसी भी प्रकार की समस्या आने पर उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क कर सकती हैं।

गोरखपुर जनपद के कौड़ीराम क्षेत्र में ग्राम बलुआ में वर्ष 1957 में पैदा हुए डॉ.रामनवल ने वर्ष 1990 में एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की। वर्ष 1992 में उनकी पहली पोस्टिंग देवरिया में हुई। वहां पर वर्ष 1995 से महिला नसबन्दी करना शुरू कर दिया। देवरिया में वर्ष 1995 से 2004 तक उनके द्वारा करीब 24000 महिला नसबन्दी की गयी। वर्ष 2004 में महाराजगंज जनपद में पोस्टिंग हुई तो उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र परतावल के अधीक्षक का दायित्व मिला।महराजगंज में तैनाती से अब तक उनके द्वारा करीब 1.08 लाख महिला नसबन्दी की गयी।

डॉ रामनवल बताते हैं कि  उनके साथ महिला नसबन्दी में स्टॉफ नर्स और आशा की अहम भूमिका होती है । उन्हें सबसे बेहतर सहयोग स्टाफ नर्स सुनीता श्रीवास्तव देती हैं। नसबन्दी के लिए उपकरण को ठीक से स्टरलाइज्ड करने का तौर तरीका सुनीता को पता है।इतना ही नहीं सुनीता महिलाओं की सघन काउंसिलिंग भी करती हैं। वह मेडिकल जांच व परामर्श के जरिये नसबंदी के योग्य लाभार्थी का चुनाव भी करती हैं ।

सर्जन डॉ. रामनवल से नसबन्दी कराने वाली लाभार्थी निचलौल क्षेत्र के ग्राम बजही निवासी रेशमा( 38) ने बताया कि  वह पांच साल पहले निचलौल अस्पताल पर नसबन्दी कराने गयीं। डॉक्टर ने नसबंदी ठीक से किया और उन्हें आज तक कोई परेशानी नहीं हुई। वह बताती हैं कि उनके दो बच्चे हैं। जब उनका छोटा लड़का एक साल का हुआ तभी वह नसबन्दी कराना चाहती थी, लेकिन काउंसिलिंग के दौरान स्टॉफ नर्स सुनीता श्रीवास्तव ने नसबन्दी कराने से मना कर दिया। उन्हें बताया गया कि जब छोटा बच्चा तीन साल का हो जाएगा तब नसबन्दी होगी। इस बीच उन्होंने आईयूसीडी लगवा कर परिवार को नियोजित रखा।

ब्लॉक की आशा संगिनी रिंकू बताती हैं कि क्षेत्र की महिलाओं को डॉ. रामनवल के बारे में जानकारी है । प्रेरित करने परबहुत सी महिलाएं डॉ.रामनवल से ही नसबन्दी कराने की इच्छा जताती हैं । वह महिलाओं को ठीक से समझा कर उनकी शंकाओं को दूर कर देते हैं।