लखनऊ - साईटिका किसी भी स्त्री पुरुष को हो सकता है किसी भी आयु में हो सकता है परंतू 50 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में अधिक सम्भावना रहती है। अधिक तेजी से सीढ़ियां चढ़ने उतरने से, अधिक वजन उठाने से, एक हाथ में अधिक वजन उठाकर चलने से, उंची नीची जगह पर अचानक पैर रखा जाने से, अधिक उछल कूद से, झुक कर वजन उठाने से, गिर जाने से, पैर फिसल जाने से, अधिक पेट और वजन बढ़ने से या कुछ और कारणों से रीढ़ की हड्डी के मनकों की सैटिंग खराब हो जाने से पैरों में जाने वाली नसें दबाव में आ जाने से साईटिका दर्द होता है, यह कमर से चल कर एक नस में पैर तक जाता है।
अगर आप नंगे पैर फर्श पर चल रहें हो और आपको महसूस हो कि आपके पैर के नीचे कुछ चिपक रहा है। और आप पैर के नीचे देखैं कि कुछ भी नहीं चिपका है परंतु चलने पर कुछ चिपका हुआ महसूस हो तो समझ ले कि आपको साईटिका होने वाला है या हो चुका है।
साईटिका का ईलाज दवाईंयां खाने से नही हो सकता। इस लिये साईटिका के नाम पर अंग्रेजी दवाईयां खा कर अपनी सेहत और धन बर्बाद मत करें एवं दर्द से बचने के लिये दर्द निवारक दवाऐं खाने से बचें।
साईटिका के ईलाज के लिये फिजियोथेरेपी सबसे उत्तम उपाय : अगर आपके आसपास कोई पेड़ हो और उसकी कोई मजबूत टहनी सीधी ग्रांउड लैवल के समांतर हो, आप अपने दोनो हाथो से उस टहनी को पकड़ कर बिना मुड़े सीधा लटक जायें। ध्यान रहे टहनी कमजोर ना हो। जितनी देर आपकी कमर सह सके उतनी ही देर लटके रहें।। और फिर आराम से उतरें। ऐसा तीन बार करें। धीरे-धीरे समय बढ़ाते चलें जायें।
टहनी की जगह आप अपने घर के गेट के उपर लगी ग्रिल या झूले आदी के पाईप के सहारे भी लटक सकते हैं। बेड पर उल्टा लेट कर दर्द वाली जगह को गर्म पानी की बोतल से दस मिनट सिकाई करे एवं नियमित रूप हलकी सैर भी किया करें।किसी दीवार के साथ सट कर खड़े होकर गर्दन को बिल्कुल सीधा करके सिर को भी दीवार के साथ लगा कर तीन से पांच मिनट तक सीधे खड़ें हो।
कर सकते हैं निम्न उपाय :
यह तकलीफ बिल्कुल खत्म तो नहीं होगी परन्तु 99% तक आपको आराम महसूस होगा।
डिसक्लेमर: लेख में उल्लिखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।