साईटिका के ईलाज के लिये फिजियोथेरेपी सबसे उत्तम उपाय : डॉ अलका सक्सेना



लखनऊ - साईटिका किसी भी स्त्री पुरुष को हो सकता है किसी भी आयु में हो सकता है परंतू 50 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में अधिक सम्भावना रहती है। अधिक तेजी से सीढ़ियां चढ़ने उतरने से, अधिक वजन उठाने से, एक हाथ में अधिक वजन उठाकर चलने से, उंची नीची जगह पर अचानक पैर रखा जाने से, अधिक उछल कूद से, झुक कर वजन उठाने से, गिर जाने से, पैर फिसल जाने से, अधिक पेट और वजन बढ़ने से या कुछ और कारणों से रीढ़ की हड्डी के मनकों की सैटिंग खराब हो जाने से पैरों में जाने वाली नसें दबाव में आ जाने से साईटिका दर्द होता है‌, यह कमर से चल कर एक नस में पैर तक जाता है।

अगर आप नंगे पैर फर्श पर चल रहें हो और आपको महसूस हो कि आपके पैर के नीचे कुछ चिपक रहा है। और आप पैर के नीचे देखैं कि कुछ भी नहीं चिपका है परंतु चलने पर कुछ चिपका हुआ महसूस हो तो समझ ले कि आपको साईटिका होने वाला है या हो चुका है।
साईटिका का ईलाज दवाईंयां खाने से नही हो सकता। इस लिये साईटिका के नाम पर अंग्रेजी दवाईयां खा कर अपनी सेहत और धन बर्बाद मत करें एवं दर्द से बचने के लिये दर्द निवारक दवाऐं खाने से बचें।

साईटिका के ईलाज के लिये फिजियोथेरेपी सबसे उत्तम उपाय : अगर आपके आसपास कोई पेड़ हो और उसकी कोई मजबूत टहनी सीधी  ग्रांउड लैवल के समांतर हो, आप अपने दोनो हाथो से उस टहनी को पकड़ कर बिना मुड़े सीधा लटक जायें। ध्यान रहे टहनी कमजोर ना हो। जितनी देर आपकी कमर सह सके उतनी ही देर लटके रहें।। और फिर आराम से उतरें। ऐसा तीन बार करें। धीरे-धीरे समय बढ़ाते चलें जायें।
टहनी की जगह आप अपने घर के गेट के उपर लगी ग्रिल या झूले आदी के पाईप के सहारे  भी लटक सकते हैं। बेड पर उल्टा लेट कर दर्द वाली जगह को गर्म पानी की बोतल से दस मिनट सिकाई करे एवं नियमित रूप हलकी सैर भी किया करें।किसी दीवार के साथ सट कर खड़े होकर  गर्दन को बिल्कुल सीधा करके सिर को भी दीवार के साथ लगा कर तीन से पांच मिनट तक सीधे खड़ें हो।

कर सकते हैं निम्न उपाय :

  • एक कटोरी तिल के तेल में सात कलियां लहुसन और आधा चम्मच अजवाइन डाल कर कुछ देर पका लें, उसको छान कर रख लें।गुनगुने से गर्म तेल के साथ दर्द वाले स्थान की मालिश करवाएं। मालिश नीचे से उपर की ओर पैर से कमर की ओर करें। यह सब कुछ करते समय ध्यान रखें कि झटका बिल्कुल ना लगें। मालिश बहुत अधिक रगड़ कर मत करें।
  • पैर के नीचे के दर्द वाले पांईट व सुन्न पाइंट किसी पेंसिल या नाड़ा डालने की सिलाई या ऐसी ही वस्तु से दबवायें। उल्टा लेट जायें। फिर जिस नस में दर्द है उसको पैर से टांग फिर कूल्हे की ओर जाते हुए रीढ़ की हड्डी तक ऐसे दबवाऐं कि खून का प्रैशर उस नस में नीचे से उपर को पड़े।
  • बेड पर बिना तकिया सीधा शरीर को बिल्कुल ढीला करके लेटें जायें। किसी दूसरे से बाईं टांग को घुटने के थोड़ा उपर से पकड़ कर बाकी टांग को बाजू के सहारा देते हुऐ सीधा वहां तक उपर तक उठा कर ले जायें जहां तक उठ सके और जहां दर्द होने लगे वहां रुक जामें।  कुछ देर रोक कर नीचे ले जायें। ऐसा तीन बार करे। तीन बार ही दाईं टांग के साथ ऐसा व्यायाम करवायें। उसके बाद पांच मिनट आराम से लेटे रहें।
  • टांग को उपर उठा कर ध्यान रहे घुटना सीधा रहे, पैर की एड़ी को उपर की ओर खींचते हुए पैर के पंजे को अंदर को मोड़ें जिससे टांग की पिछली साईड की नसें दबेंगी। ऐसा पहले दाएं पैर और फिर बायें पैर के साथ तीन तीन बार करें।
  • ऊंची एड़ी के जूते चप्पल मत पहने।
  • साफ्ट गद्दे वाले बेड ही सोयें। कोशिश करें की बिल्कुल सीधा ही सोयें और तकिया ना लें। और जब सीधा लेटे हों तो बालों का जूड़ा खोल दें।
  • जब करवट लेकर लेटें तब गर्दन के नीचे बिल्कुल साफ्ट तकिया लें। ताकि गर्दन सीधी रहे।
  • कभी भी लेटकर मोबाईल यूज मत करें और मोबाईल यूज करते समय गर्दन सीधी रखें।

यह तकलीफ बिल्कुल खत्म तो नहीं होगी परन्तु 99% तक आपको आराम महसूस होगा।

 

डिसक्लेमर: लेख में उल्लिखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।

 

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