लखनऊ - प्रदेश में नवजात शिशु मृत्यु दर कम करने के उद्देश्य से 15 नवम्बर यानि बुधवार से नवजात शिशु देखभाल सप्ताह शुरू हो रहा है, जो कि 21 नवम्बर तक चलेगा। इस दौरान स्वास्थ्य टीम विविध गतिविधियों करेंगी। इस संबंध में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक पिंकी जोवल ने जनपदों को निर्देश जारी किया है। वहीं प्रमुख सचिव चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण पार्थ सारथी सेन शर्मा भी समय-समय पर निर्देश जारी करते रहे हैं।
प्रदेश में जन्म के समय ज्यादा गंभीर अवस्था वाले नवजात शिशुओं की देखभाल सुनिश्चित करने के लिए बड़े अस्पतालों और मेडिकल कालेज मे 98 एसएनसीयू (सिक न्यूबोर्न केयर यूनिट) क्रियाशील हैं वहीं ब्लॉक स्तर पर एनबीएसयू (न्यू बोर्न केयर यूनिट) के माध्यम से और समुदाय स्तर पर 1 लाख 70000 आशाओं के माध्यम से होम बेस्ड न्यू बोर्न केयर कार्यक्रम द्वारा नवजात देखभाल सुनिश्चित की जा रही है इसके अलावा ई -कवच के माध्यम से सभी नवजातों के स्वास्थ्य का अनुश्रवण और मंत्रा एप के माध्यम से नवजात पंजीकरण सुनिश्चित किया जा रहा है शासन से निर्देशित पत्र में कहा गया है कि समुदाय को नवजात के जन्म के एक घंटे के अंदर मां का गाढ़ा पीला दूध, छह माह तक केवल स्तनपान और छह माह के बाद ऊपरी आहार देने के लिए जागरूक करें। इससे नवजात को कुपोषण से बचाने में मदद मिलेगी। साथ ही कम वजन के नवजात व अधिक जोखिम वाली गर्भवती माताओं की पहचान कर उनके देखभाल के लिए आवश्यक कदम उठाएं। समय से पहले जन्मे नवजात की विशेष देखभाल व सभी शिशुओं का समय से नियमित टीकाकरण करें। इस वर्ष इस दिवस की थीम “नवजात जीवन की देखभाल- सामुदायिक एवं स्वास्थ्य इकाई की सहभागिता से” निर्धारित की गई है। गौरतलब है कि एसआरएस 2020 के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश की नवजात शिशु मृत्यु दर 28 प्रति 1000 जीवित जन्म है जबकि राष्ट्रीय नवजात शिशु मृत्यु दर 20 है। प्रदेश में लगभग 1,68,000 नवजात की मृत्यु एक माह की आयु पूरी होने से पहले हो जाती है। जो कि पांच वर्ष से कम आयु में शिशु मृत्यु का 65 प्रतिशत से अधिक है।
वहीं बाल स्वास्थ्य सेवा संबंधी नए अंतर्राष्ट्रीय मानक निर्धारित करने के लिए शोध की पहल हुई है। इस संबंध में इथोपिया से प्रशिक्षण प्राप्त कर लौटे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के बाल स्वस्थ्य के महाप्रबंधक डॉ. वेद प्रकाश ने बताया कि यह बहुत ही गर्व की बात है कि इस अंतर्राष्ट्रीय शोध में हमारा उत्तर प्रदेश भी शामिल है। यूपी में कानपुर मेडिकल कॉलेज में शोध होगा। वहीं देश के का दूसरा केंद्र हरियाणा बनाया गया है। उन्होंने बताया कि हाल ही में अमेठी में एसएनसीयू खुलने के बाद अब सभी जिलों में कम से कम एक या उससे अधिक एसएनसीयू क्रियाशील हो गए हैं। इससे बाल स्वास्थ्य सेवाओं को और गुणवत्ता मिल सकेगी।
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