11 एनडीआरएफ का गठन 15 सितंबर 2015 को हुआ था, जिसका वाहिनी मुख्यालय गौतम बुध भवन चौकाघाट वाराणसी में स्थापित किया गया था I 11 एनडीआरएफ वाहिनी के राहत बचाव कार्य सहज और सुचारू रूप से हो सके, उसके लिए लखनऊ, गोरखपुर और भोपाल में क्षेत्रीय प्रतिक्रिया केंद्रों की स्थापना की गई, जहां से एनडीआरएफ उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के अपने कार्य क्षेत्र में प्रभावी तरीके से आपदा बचाव के कार्य की जिम्मेदारियां निभा सके । वाहिनी में कुल 18 टीमें हैं जो हर प्रकार की प्राकृतिक एवं मानव जनित आपदा से निपटने के लिए सक्षम हैं I
एनडीआरफ विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करती है जैसे:
11 एनडीआरएफ वाराणसी ने इन पांच सालों में विभिन्न आपदाओं एवं राहत बचाव कार्यों में अनेकों बहुमूल्य जीवन को बचाया है । जिनमें से मुख्य बचाव एवं राहत अभियान हैं :
इन सब बचाव अभियानों के अतिरिक्त एनडीआरएफ नियमित रूप से विभिन्न दुर्घटनाओं में बचाव एवं राहत कार्य भी करती है । जैसे ट्रेन दुर्घटना, नदी में डूबने की घटना, सड़क हादसों में, कुएं में गिरने की दुर्घटना में- हाल ही में विदिशा में एक कुएं में बच्चे को बचाने के लिए कई लोग कुएं में गिर गए जिन्हें 26 घंटे लगातार चले खोज अभियान के तहत एनडीआरएफ और प्रशासन के सहयोग से निकाला गया । इसी प्रकार मध्यप्रदेश के सिधी जिले में यात्रियों से भरी बस दुर्घटनावश नहर में जा गिरी, जिसमें पांच दिन लंबे चले रेसक्यू ऑपरेशन में सभी डूबे व्यक्तियों को एनडीआरएफ व सहायक एजेंसियों द्वारा निकाला गया। एनडीआरएफ जंगल की आग को बुझाने एवं राहत बचाव कार्य में भी प्रशासन को सहयोग करती है । इस वर्ष मिर्जापुर के जंगलों और उत्तराखंड में अल्मोड़ा के जंगलों में लगी भीषण आग को बुझाने के लिए एनडीआरएफ टीम द्वारा प्रशासन एवं फायर एजेंसियों को सहयोग किया गया ।
11 एनडीआरएफ वाराणसी की टीमें चक्रवाती तूफानों में भी राहत बचाव के कार्य करती है। फेनी चक्रवात-ओडिशा और यास चक्रवात पश्चिम बंगाल में हमारी टीमों ने लोगों को चक्रवात संभावित क्षेत्रों से सुरक्षित निकालकर साइक्लोन शेल्टर तक पहुंचाया और इसके साथ ही बाधित यातायात को सुचारू रूप से चलाने के लिए बड़े-बड़े वृक्षों को काट कर हटाया और बिजली व्यवस्था को पुनः स्थापित करने में प्रशासन को सहयोग किया ।
एनडीआरएफ आपदाओं में राहत बचाव का कार्य तो करती ही है इसके अतिरिक्त सामान्य परिस्थितियों में विभिन्न एजेंसियों के साथ मिलकर मॉक ड्रिल और मॉक अभ्यास भी करती है । जिससे सभी एजेंसियों में आपसी तालमेल स्थापित हो और आपदा के समय त्वरित कार्यवाही कर बचाव कार्य किया जा सके । एनडीआरएफ विभिन्न आपदाओं पर आधारित अलग - अलग मॉक अभ्यास करती है, जैसे- भूकंप को लेकर, रेल हादसे पर, बाढ़, CBRN केमिकल बायोलॉजिकल रेडियो लॉजिकल और न्यूक्लियर संभावित दुर्घटनाओं एवं आपदाओं को लेकर पूर्वाभ्यास करती है ।
एनडीआरएफ दुर्घटना एवं आपदा संभावित जिलों में FAMEX भी करती है । इसके तहत टीम ज़िले में रहकर पूरे जिले का डाटा, Hazard Mapping और Vulnerability Profile तैयार करती है । जिसमें जिले में बहने वाली नदियों, इंडस्ट्रियों, फैक्ट्रियों, Hazardous Materials, पूर्व में आई आपदाओं का ब्यौरा, Rehabilitation Centres की जानकारी, बचाव एजेंसियों का नाम, पता, संसाधन, फोन नम्बर सब अपडेट किया जाता है । जिससे उस क्षेत्र को जानने और आपदा के समय बचाव कार्य में आसानी होती है ।
CAP- Community Awareness Programme : आपदा के समय घटना स्थल पर किसी रेस्क्यू एजेंसी के पहुँचने से पहले Local Community पहुँचती है I इसलिए Local Community को First Responder की संज्ञा दी गयी है I उसी धारणा को ध्यान में रखते हुए NDRF लगातार Community Awareness Programme के माध्यम से समाज के सभी वर्गों को आपदाओं के प्रति जागरूक करती है व ट्रेनिंग देती है I
CBP- Capacity Building Programme : प्रशासनिक इकाइयों एवं संगठनों की कार्य कुशलता और क्षमताओं को बढ़ाने के किये आपदा बचाव सम्बन्धित कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं I
SSP-School Safety Programme : स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालयों आदि शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों, अध्यापकों व स्टाफ को आपदा से बचाव की जानकारी व ट्रेनिंग प्रदान की जाती है I
11 एनडीआरएफ आपदाओं में राहत बचाव के कार्य करने वाली एजेंसियों, सरकारी और गैर सरकारी संगठनों एवं संस्थाओं को भी प्रशिक्षण प्रदान करती है । जिसमें CAPF के जवानों, एसडीआरएफ, होम गार्ड, एनसीसी कैडेट्स, आपदा मित्र, नेहरू युवा केन्द्र संगठन के वालंटियरों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।
करोना महामारी से जब पूरा देश जूझ रहा था उस समय भी एनडीआरएफ करोना महामारी की पहली और दूसरी लहर में बढ़-चढ़कर राहत कार्य कर रही थी । इस दौरान टीम ने अति संवेदनशील स्थलों, सार्वजनिक स्थानों, संकरी गलियों में बृहद सेनिटाइजेशन अभियान चलाया । उसके साथ ही दूसरे राज्यों से विशेष ट्रेनों द्वारा आए छात्रों और मजदूरों की स्क्रीनिंग करने, Decontamination करने, सामाजिक दूरी का पालन कराने में प्रशासन को सहयोग किया ।
लॉकडॉउन की स्थिति में एनडीआरएफ ने गरीब और बेसहारा लोगों को राहत एवं खाद्य सामग्री वितरित की, साथ ही लोगों को व्यक्तिगत स्वच्छता, हाथ धोने के तरीके, सामाजिक दूरी का पालन, मास्क- सैनिटाइजर का सही उपयोग व कोरोना बचाव के नियमों के महत्व को भी समझाया । इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए एनडीआरएफ ने बड़े पैमाने पर जन जागरूकता अभियान भी चलाए ।
आरोग्य से आपदा प्रबंधन कार्यक्रम के तहत एनडीआरएफ ने चंदौली, वाराणसी और लखनऊ में निःशुल्क चिकित्सा शिविरों का आयोजन किया । जिसमें ग्रामीण व पिछड़े इलाकों के निर्धन, बेसहारा, मजदूर किसान एवं विशेषकर महिलाओं और बच्चों को सम्पूर्ण निःशुल्क पैथोलॉजिकल परिक्षण और दवाइयाँ प्रदान की गई I इसके साथ ही चिकित्सा सेवा तथा समग्र जागरूकता प्रदान कर उन्हें सबल और सक्षम बनाकर स्वस्थ समाज के निर्माण हेतु अभियान चलाया गया I वाराणसी में विभिन्न क्षेत्रों व राजघाट से लेकर अस्सी घाट तक माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रदान की गई वाटर एंबुलेंस के माध्यम से गरीब व जरूरतमंद लोगों के लिए एनडीआरएफ के डॉक्टरों की टीम द्वारा नि:शुल्क चिकित्सा शिविर लगाए गए । जिसमें लोगों की जांच कर उनके रोगानुसार निःशुल्क दवाइयां दी गई । इसके साथ ही कोरोना संभावित मरीजों को नि:शुल्क कोरोना किट भी वितरित की गई ।
एनडीआरएफ राहत बचाव कार्यों के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी अपनी अहम भूमिका निभाती आई है और राज्य सरकार को सहयोग करते हुए वृक्षारोपण अभियान के तहत बृहद पैमाने पर छायादार और फलदार पेड़ों को लगाया गया है I इसके अतिरिक्त जल सरंक्षण अभियान के तहत पुराने तालाबों के जीर्णोंधार, काशी के घाटों व गंगाजी को स्वच्छ निर्मल करने के आयोजनों में भी अपनी सहभागिता दर्ज कराते हैं I
कोरोना की तीसरी लहर को लेकर भी एनडीआरएफ सजग है और अपनी पूरी तैयारी के साथ वाहिनी मुख्यालय और बाढ़ आपदा में बचाव के लिए तैनात है I हमारी प्रत्येक टीम कॉविड सेफ्टी, Decontamination, Sanitization इत्यादि में सक्षम है, प्रत्येक टीम में प्रशिक्षित नर्सिंग असिस्टेंट, मेडिकल स्टाफ मौजूद हैं और सभी टीमें कॉविड प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करते हुए जनसेवा के लिए तत्पर हैं I
मानसून 2021 के संदर्भ में एनडीआरएफ की तैयारी
मानसून सीजन ने उत्तर प्रदेश में दस्तक दे दी है, इस संदर्भ में एनडीआरएफ लगातार IMD, CWC, Irrigation Department, Nepal Hydrology इत्यादि एजेंसीयों से लगातार संपर्क में है और मानसून की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए रखे है, साथ ही साथ उत्तर प्रदेश शासन, SDMA, Relief Commissioner, SDRF से समन्वय बनाते हुए टीमों का Preposition Deployment कर दिया गया है I जिसमें श्रावस्ती, बहराइच, सिद्धार्थनगर में एक-एक टीम और लखनऊ, गोरखपुर और भोपाल में दो-दो टीमों को तैनात कर दिया गया है I इसके अलावा अन्य टीमें अपने संसाधनों के साथ वाहिनी मुख्यालय में तैयारी हालत में हैं व जरूरत पड़ने पर कभी भी, कहीं भी राहत एवं बचाव कार्य के लिए जा सकते हैं, साथ ही साथ मैं यह भी बताना चाहूंगा कि अत्यंत गंभीर स्थिति में देश के दूसरे हिस्सों की एनडीआरएफ टीमों को उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश के प्रभावित इलाकों में तैनात किया जा सकता है I वाराणसी जनपद व आस-पास के क्षेत्रों के लिए दो टीमें सभी संसाधनों के साथ तैयारी हालत में वाहिनी मुख्यालय में मौजूद हैं तथा एक टीम दशाश्वमेध घाट पर Flood Emergency, Drowning Incident, पक्के महाल में CSSR ऑपरेशन के लिए पहले से ही तैनात है I