नई दिल्ली। देश में तेज़ी से उभरते संस्मय प्रकाशन द्वारा रविवार को अपने चयनित 19 रचनाकारों को संस्मय सम्मान से सम्मानित दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ़ इंडिया में किया गया। आयोजन में मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध कहानीकार चित्रा मुद्गल व विशिष्ट अतिथि भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) के पूर्व महानिदेशक प्रोफेसर संजय द्विवेदी, सुभाष चंदर, प्रो. हरीश अरोड़ा, डी के शर्मा व अरविन्द तिवारी रहे।
अतिथि स्वागत संस्मय की निदेशक भावना शर्मा, संस्थापक शिखा जैन, डॉ. अर्पण जैन 'अविचल', गणतंत्र ओजस्वी, नीलम झा ‘नील’ ने किया। विशिष्ट अतिथि प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि 'लेखन व्यक्ति को एकाकी नहीं बनने देता और साहित्य मनुष्य को मनुष्यता की ओर ले जाता है। यही कारण है कि समाज में लेखन भी जीवित है और मनुष्यता भी।'
प्रो. हरीश अरोड़ा ने कहा कि 'हिंदी को बनाने में मातृभाषाओं की भूमिका है, उस चेतना से भारत का सांस्कृतिक विस्तार होता है। बाज़ारवाद के दौर में अंग्रेज़ी का वर्चस्व होने लगा, जिससे मातृभाषाएँ गौण होने लगीं, तब राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने जान डाली है।'
विशिष्ट अतिथि सुभाष चंदर ने कहा कि 'मोबाइल की चकाचौंध को दूर हटाकर किताबों की सौंधी सुगन्ध तक पहुँचाने का काम संस्मय कर रहा है। यह अनुकरणीय है।' साथ ही, यमुना काउंसिल के निदेशक कपिल गर्ग, इन्दौर प्रेस क्लब के अध्यक्ष अरविंद तिवारी व कोर्ट स्पोर्ट्स एकेडमी के निदेशक डी के शर्मा ने भी संबोधित किया।
कार्यक्रम का संचालन कामना मिश्रा ने व आभार अपूर्व माधव झा ने माना। कार्यक्रम के मुख्य सहयोगी कोर्ट स्पोर्ट्स एकेडमी रही। संस्मय की पूरी टीम का साथ प्राप्त हुआ जिसमें शामिल रहे नीलम झा ‘नील’, प्रीति खरवार, नीता झा, भागीरथ सिन्हा, साथ ही, देश की कई प्रसिद्ध हस्तियाँ, पत्रकार एवं साहित्यकार आयोजन में सम्मिलित हुए।