गोवा की दर्शना पेडनेकर ने बचपन में ही अपने पिता के साथ खेती में हाथ बंटाकर शुरुआत की थी। पारंपरिक खेती में मुनाफे के साथ शुरुआत ने दर्शना को इसी क्षेत्र में मोड़ दिया। लेकिन बीते वर्ष कोविड महामारी के दौरान लॉकडाउन उनके लिए नई मुसीबत लेकर आया। नारियल की जिस खेती से उन्हें पहले अच्छा-खासा मुनाफा होता था, वो बेहद कम हो गया। आखिर में दर्शना ने नारियल की फूड प्रोसेसिंग की ओर कदम बढ़ाया। अब वे नारियल सुखा कर उसका तेल निकालकर बेचती हैं। 300 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बिकने वाले नारियल के इस तेल ने दर्शना की खेती को नया मुकाम दिया है। यही नहीं, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद(आईसीएआर) से ट्रेनिंग लेने के बाद दर्शना अब अपनी 4 एकड़ की जमीन पर ही बर्मी कम्पोस्ट बनाने से लेकर धान और टमाटर व मिर्ची जैसी पारंपरिक फसलों की खेती नए तरीके से करती हैं। दर्शना कहती हैं, ''पारंपरिक खेती के बजाय इसमें बहुत मुनाफा है। ऊपर से केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और साथ ही प्रशिक्षण व अन्य मदद ने उन्हें नया रास्ता दिखाया है।''
दर्शना दरअसल, उस सोच की प्रतीक है, जिसमें विज्ञान को कृषि से जोड़कर नए इनोवेशन के रास्ते भारत को आत्मनिर्भर बनाने की ललक है। क्योंकि लंबे समय से चली आ रही पारंपरिक परिपाटी को इनोवेशन के सहारे ही बदला जा सकता है। भारत बीते 7 वर्षों में इसी रास्ते आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 सितंबर को आईसीएआर द्वारा विकसित 35 विशेष गुण वाली उन्नत किस्मों को राष्ट्र काे समर्पित करते हुए कहा , ''जब साइंस, सरकार और सोसायटी मिलकर काम करेंगे तो उसके नतीजे और बेहतर आएंगे। किसानों और वैज्ञानिकों का ऐसा गठजोड़, नई चुनौतियों से निपटने में देश की ताकत बढ़ाएगा।'' इन फसलों की किस्मों को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने काफी रिसर्च के बाद तैयार किया है, इनके जरिए फसलों पर जलवायु परिवर्तन और कुपोषण के असर को कम किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने रायपुर में राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान के नवनिर्मित परिसर का लोकार्पण किया। इस संस्थान की स्थापना जैविक संबंधी दिक्कतों को दूर करने में बुनियादी और रणनीतिक अनुसंधान करने, मानव संसाधन विकसित करने तथा नीतिगत सहायता प्रदान करने के लिए की गई है।
विशेष गुण वाली 35 फसलों की किस्में : भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद संस्थान ने जलवायु परिवर्तन और कुपोषण की चुनौतयों से निपटने में सक्षम विशेष गुणों वाली फसल किस्मों को 2021 में विकसित किया है। इनमें सूखे को बर्दाश्त करने वाली चने की किस्म बिल्ट और मोजर, अरहर, सोयाबीन की जल्दी पकने वाली किस्में, चावल की प्रतिरोधी किस्में और गेंहू, बाजरा, मक्का, चना, विनोमा, कुटटू, बिंगेटविन और भाबाविन की जैविक किस्में शामिल हैं। इनमें विशेष लक्षणों वाली किस्में भी शामिल हैं जो कुछ फसलों में पाये जाने वाले पोषण रोधी कारकों का समाधान करती हैं जो मानव और पशु स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के महत्वपूर्ण बिंदु -
Source : New India Samachar