गोण्डा। जनपद मुख्यालय से 32 किलोमीटर दूर विकासखंड वजीरगंज के ग्राम लक्ष्मणपुर गौरिया तथा मधवापुर तिखड़िया स्थित पार्वती अरगा पक्षी विहार का सौंदर्य किसी स्वर्ग से कम नही है। नवंबर की सर्दियां शुरू होते ही अरगा झील के जल मे मध्य एशिया व तिब्बत से आने वाले विदेशी पक्षियों का कलरव शुरू हो चुका है। जिसे देखने के लिए दूर दराज के सैलानियों का आगमन शुरू हो चुका है।
पार्वती और अरगा दोनों झीलें गोखुर आकार की हैं। दोनों झीलों की निकटतम दूरी 1.5 किलोमीटर है। यह झील पौराणिक व प्राकृतिक दृष्टिकोण से भी काफी महत्वपूर्ण है। कहा जाता है कि इस झील के पास ही शिव पार्वती का प्राचीन मंदिर है। इसी कारण इस झील का नाम पार्वती अरगा पड़ा है। दोनों झीलों का कुल क्षेत्रफल 1084.47 हेक्टेयर पंक्षी विहार के अंतर्गत है। अवगत हो कि पक्षी विहार से 1 किलोमीटर दूरी पर टिकरी रेंज का आरक्षित वन क्षेत्र है। यह क्षेत्र सरयू नदी का अवशेष है। इस पक्षी विहार मे पक्षियों के साथ ही विभिन्न मछलियां व सरीसृप पाए जाते हैं। इसमें जलीय एवं अस्थलीय वनस्पतियां भी पायी जाती हैं। प्रति वर्ष इस झील मे लाखों की संख्या मे स्थानीय व प्रवासी पक्षी प्रवास करते हैं।
पार्वती अरगा झील मे विदेशी पक्षियों का आगमन आमतौर पर अक्टूबर के माह मे शुरू हों जाता है और वह नवंबर से लेकर मार्च तक यहाँ रहते हैं। कहा जाता है कि झील कि यात्रा के लिए विदेशी पक्षियों का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से 15 मार्च तक रहता है, खास कर 15 नवंबर के बाद इनके आने की संख्या मे बढ़ोतरी हो जाती है। ये विदेशी पक्षी इस जल मे लगातार 4 महीने विचरण करके मार्च माह के अंत मे वापस चले जाते हैं।