नई दिल्ली : श्रद्धा, सुरक्षा और आस्था के बीच एक बार फिर हिमालय की पवित्र वादियों में बाबा बर्फानी के जयकारों की गूंज सुनाई देने लगी है। आने वाले दिनों में शुरू होने जा रही अमरनाथ यात्रा को लेकर जम्मू-कश्मीर में आध्यात्मिक माहौल पूरी तरह से सज चुका है, और तैयारियों का सिलसिला अंतिम चरण में पहुंच गया है। इसी पवित्र अवसर से पहले, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को अमरनाथ गुफा में 'प्रथम पूजा' संपन्न की, जिसके साथ वार्षिक अमरनाथ यात्रा की औपचारिक शुरुआत मानी गई।
इस अवसर पर उन्होंने बाबा बर्फानी के दर्शन कर देश की शांति, समृद्धि, स्वास्थ्य और सभी नागरिकों की भलाई के लिए प्रार्थना की। श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उपराज्यपाल ने सभी श्रद्धालुओं को इस पवित्र यात्रा में बड़ी संख्या में शामिल होने का आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि प्रशासन, सेना, पुलिस, सुरक्षा बल, और स्वयंसेवक मिलकर पूरी समन्वित व्यवस्था में कार्य कर रहे हैं ताकि यात्रियों को सुरक्षित, सुगम और यादगार अनुभव मिल सके।
यात्रा 3 जुलाई 2026 से शुरू होकर 57 दिनों तक चलेगी और दो प्रमुख मार्गों अनंतनाग जिले में पहलगाम मार्ग और गांदरबल जिले में बालटाल मार्ग से समान रूप से संचालित होगी। यह यात्रा 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के दिन समाप्त होगी। इसी बीच, यात्रा से पहले सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस सहित सभी सुरक्षा बल राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (NH-44) पर रोड ओपनिंग पार्टियों (ROP) के माध्यम से लगातार निगरानी और तलाशी अभियान चला रहे हैं, ताकि यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके।
प्रत्येक ROP टीम 4-5 किलोमीटर के हिस्से की बारीकी से जांच कर रही है और आसपास के क्षेत्रों की सघन तलाशी ली जा रही है। इसके साथ ही बम डिटेक्शन एंड डिस्पोज़ल स्क्वाड (BDDS) और डॉग स्क्वॉड भी सुरक्षा जांच में शामिल हैं। वरिष्ठ अधिकारी लगातार जमीनी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर रहे हैं और आवश्यकतानुसार स्वयं भी निगरानी अभियान में भाग ले रहे हैं, ताकि पूरी यात्रा शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न हो सके।