डॉ. सूर्यकान्त बने टी.बी. की राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के प्रेसिडेन्ट



  • डॉ. सोनिया नित्यानंद, कुलपति केजीएमयू ने डॉ. सूर्यकान्त को दी बधाई

लखनऊ । किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकान्त को ट्यूबरकुलोसिस एसोसिएशन ऑफ इंडिया (TAI) द्वारा आयोजित होने वाले 81वें नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन ट्यूबरकुलोसिस एंड चेस्ट डिजीज (NATCON 2026) का प्रेसिडेन्ट नामित किया गया है। यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस 1 से 4 अक्टूबर 2026 तक पंजाब के पटियाला में आयोजित की जाएगी।

ट्यूबरकुलोसिस एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सचिव-जनरल (इंडिया) श्री विक्रम मल्होत्रा द्वारा जारी पत्र में बताया गया है कि ट्यूबरकुलोसिस एसोसिएशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन ने डॉ. सूर्यकान्त को 81वें NATCON 2026 का प्रेसिडेन्ट एवं स्टैंडिंग टेक्निकल कमेटी का चेयरमैन मनोनीत करने का निर्णय लिया है। वे पूरे सम्मेलन के दौरान प्रेसिडेन्ट के रूप में कार्य करेंगे तथा डॉ. सूर्यकान्त सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में प्रेसिडेन्शियल एड्रेस भी देंगे। 

यह नियुक्ति डॉ. सूर्यकान्त द्वारा टीबी के क्षेत्र में किए गए चिकित्सकीय शिक्षा, शोध, चिकित्सा एवं जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान की गई है। उनके नेतृत्व में अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजनाएँ सफलतापूर्वक संचालित हुई हैं तथा वे विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका भी निभा रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि NATCON देश का सबसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मेलन है, जिसमें क्षय रोग, श्वसन रोगों एवं जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्यरत विशेषज्ञ, चिकित्सक, वैज्ञानिक, शिक्षाविद एवं शोधकर्ता भाग लेते हैं। सम्मेलन का उद्देश्य क्षय रोग नियंत्रण, श्वसन चिकित्सा, सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीतियों, नवाचारों तथा अनुसंधान के नवीनतम आयामों पर विचार-विमर्श एवं ज्ञान-विनिमय को बढ़ावा देना है।

कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने डॉ. सूर्यकान्त को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि डॉ. सूर्यकान्त की यह नियुक्ति न केवल किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय बल्कि उत्तर प्रदेश और देश के चिकित्सा समुदाय के लिए भी गौरव का विषय है।

ज्ञात रहे कि हाल ही में गंभीर टीबी मरीजों के बेहतर उपचार के लिए “टीबी कमिटेड आईसीयू” हेतु स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) एवं गाइडलाइन तैयार करने के लिए गठित राष्ट्रीय विशेषज्ञ समिति के चेयरमैन बनाए गए हैं। इसके साथ ही वे टीबी से संबंधित कई चिकित्सकीय, शोध एवं सामाजिक समितियों के अध्यक्ष, सदस्य व सलाहकार भी हैं। डॉ. सूर्यकान्त अब तक 22 पुस्तकें लिख चुके हैं, जिनमें 4 पुस्तकें टीबी रोग पर आधारित हैं। नई शिक्षा नीति की तीसरी वर्षगांठ के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा विमोचित 100 हिंदी पुस्तकों में डॉ. सूर्यकान्त की दो पुस्तकें शामिल थीं, जिनमें से एक पुस्तक टीबी पर लिखी गई है। आईसीएमआर द्वारा देशभर में जटिल टीबी के नए उपचार हेतु संचालित बीपाल प्रोजेक्ट के केजीएमयू के मुख्य पर्यवेक्षक भी रह चुके हैं। बीपाल प्रोजेक्ट की सफलता के बाद ही एमडीआर-टीबी के नए उपचार में नई दवाओं को शुरू किया गया है।

डॉ. सूर्यकान्त राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम की नॉर्थ जोन टास्क फोर्स (उत्तर भारत के 9 राज्यों के लिए) के चेयरमैन के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इसके साथ ही वे रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ड्रग-रेजिस्टेंट टीबी केयर के संस्थापक प्रभारी हैं, जिसके तहत टीबी मरीजों को उत्कृष्ट उपचार प्रदान किया जाता है। साथ ही वे पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन केंद्र के संस्थापक प्रभारी भी हैं, जो उत्तर प्रदेश का पहला सरकारी केंद्र है, जहाँ साँस संबंधी रोगियों का पूरी तरह निःशुल्क उपचार किया जाता है। डॉ. सूर्यकान्त के नेतृत्व में पोस्ट-टीबी मरीजों, जिन्हें टीबी के इलाज के बंद होने के बाद भी खाँसी, साँस फूलने या अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है, का भी उपचार किया जाता है।

प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत योजना के अंतर्गत डॉ. सूर्यकान्त टीबी नियंत्रण एवं उन्मूलन के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में अब तक 500 से अधिक टीबी मरीजों को गोद लेकर उनके उपचार, पोषण एवं देखभाल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इसके साथ ही वर्ष 2019 से ग्राम पंचायतों एवं स्लम क्षेत्रों को गोद लेकर वहाँ टीबी उन्मूलन की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।