सौर ऊर्जा में भारत की बड़ी छलांग, अमेरिका को छोड़ा पीछे



नई दिल्ली : भारत की सौर ऊर्जा यात्रा ने एक नया मुकाम हासिल कर लिया है। पहली बार भारत ने एक वर्ष में सौर ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है और वर्ष 2025 में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सौर क्षमता संवर्धन करने वाला देश बन गया है। 

अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (IRENA) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 2025 में 37 गीगावाट से अधिक सौर क्षमता जोड़ी, जबकि अमेरिका ने 34 गीगावाट क्षमता का विस्तार किया। इसके साथ ही भारत वार्षिक सौर क्षमता वृद्धि के मामले में दुनिया में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। यह उपलब्धि देश में तेज़ी से हो रहे ऊर्जा परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती क्षमता को दर्शाती है। 

वर्ष 2014 में भारत की सौर क्षमता केवल 2.65 गीगावाट थी। 50 गीगावाट तक पहुंचने में देश को 96 महीने लगे, जबकि अगले 50 गीगावाट केवल 36 महीनों में जुड़ गए। सबसे तेज़ वृद्धि 100 से 150 गीगावाट क्षमता तक पहुंचने में दर्ज की गई, जो जनवरी 2025 से मार्च 2026 के बीच महज 14 महीनों में हासिल की गई। भारत ने जापान को भी पीछे छोड़ते हुए दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा उत्पादक देश बनने का गौरव हासिल किया है। IRENA के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने 108 हजार गीगावाट-घंटे से अधिक सौर बिजली का उत्पादन किया, जो जापान के 96 हजार गीगावाट-घंटे से काफी अधिक है।

वित्त वर्ष 2025-26 भारत के सौर ऊर्जा क्षेत्र के लिए रिकॉर्ड वर्ष साबित हुआ। इस दौरान देश ने 44.61 गीगावाट सौर क्षमता जोड़ी, जो पिछले वर्ष के 23.83 गीगावाट के रिकॉर्ड से लगभग दोगुनी है। यह आंकड़ा 34 गीगावाट के वार्षिक लक्ष्य से भी काफी अधिक है।