- राजगढ़ विकास खंड की 211 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दिए गए जरूरी टिप्स
- पीएसआई इंडिया व केनव्यू के सहयोग से आयोजित किया गया कार्यक्रम
मिर्जापुर । जनपद के राजगढ़ विकास खंड क्षेत्र की करीब 211 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को डायरिया नियंत्रण व रोकथाम में बड़ी भूमिका निभाने के लिए विशेष तौर पर प्रशिक्षित किया गया। दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से चार बैच में इन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को डायरिया की शीघ्र पहचान, बचाव के जरूरी कदम आदि के बारे में बड़े ही सरल और रोचक अंदाज में बताया गया। विकास खंड सभागार में प्रशिक्षण के आखिरी सत्र में मंगलवार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का स्पष्ट कहना था कि समुदाय में शून्य से पांच साल तक के बच्चों को डायरिया से सुरक्षित बनाने को वह खास तौर पर प्राथमिकता देंगी।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन स्वास्थ्य विभाग के तत्वावधान में पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल-इंडिया (पीएसआई-इंडिया) और केनव्यू (KENVUE) के सहयोग से “डायरिया से डर नहीं” कार्यक्रम के तहत किया गया। डायरिया के प्रति अभिमुखीकरण के साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नियमित रूप से सही तरीके से हाथ धोने की महत्ता भी समझाई गयी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजगढ़ के अधीक्षक डॉ. पवन कुमार कश्यप ने कहा कि शून्य से पांच साल तक के बच्चों की कुल मौत का एक प्रमुख कारण डायरिया भी है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस पर नियंत्रण के लिए स्टॉप डायरिया कैम्पेन (डायरिया रोको अभियान) अगले महीने से शुरू होगा, जिसे “डायरिया से डर नहीं” कार्यक्रम से और बल मिलेगा। “डायरिया से डर नहीं” कार्यक्रम के बारे में पीएसआई-इंडिया के विष्णु प्रकाश मिश्रा विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्र में समुदाय को डायरिया से बचाव के लिए जरूरी साफ-सफाई रखने, हाथ धुलने का सही तरीका, स्वच्छ जल, ताजा पौष्टिक भोजन और स्वच्छ वातावरण में ही रहने के बारे में जागरूक बना सकती हैं। डायरिया के प्रमुख लक्षणों के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी, ताकि दस्त नियंत्रण कार्यक्रम में उनकी सक्रिय भागीदारी और समझ सुनिश्चित हो सके। डायरिया से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने के लिए उठाये जाने वाले क़दमों के बारे में भी बताया गया।
अधीक्षक डॉ. पवन कश्पय ने डायरिया रोकथाम एवं उपचार के बारे में प्रशिक्षण देते हुए व्यावहारिक प्रशिक्षण और वास्तविक समय के केस डिस्कशन के माध्यम से दस्त की रोकथाम, शीघ्र निदान और प्रभावी प्रबंधन में सेवा प्रदाताओं के जरूरी कौशल के बारे में बताया। ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ओआरएस), जिंक सप्लीमेंट और टीकाकरण को बढ़ावा देने पर जोर दिया साथ ही दस्त प्रबंधन में प्रमुख निवारक उपायों के बारे में बताया। मुख्य सेविका यासमीन बानो ने रेफरल प्रणाली और रिपोर्टिंग के लिए रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था को मजबूत बनाने के बारे में बताते हुए कहा कि समुदाय से प्राप्त ऐसे केस को समय रहते उचित सुविधा केंद्र पर रेफर करके रिपोर्ट करें। उन्होंने कहा कि गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की निगरानी करना और उन्नत देखभाल के लिए समय पर रेफरल सुनिश्चित करना स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख दायित्व हैं । प्रशिक्षण कार्यक्रम में पीएसआई इण्डिया से अर्चना मिश्रा एवं मुख्य सेविका सेजल शुक्ला का विशेष योगदान रहा।